Raaste Chup Chup Songtext
von Pankaj Udhas
Raaste Chup Chup Songtext
रास्ते चुप-चुप, रोशनी मद्धम
रास्ते चुप-चुप, रोशनी मद्धम
मेरे मकाँ से उसकी गली तक
तन्हाई का एक सा आलम
मेरे मकाँ से उसकी गली तक
रास्ते चुप-चुप, रोशनी मद्धम
गुज़रे हैं इस सिम्त से शायद
क़ाफ़िले याद की परियों के
गुज़रे हैं इस सिम्त से शायद
क़ाफ़िले याद की परियों के
गुज़रे हैं इस सिम्त से शायद
क़ाफ़िले याद की परियों के
चारों तरफ़ पाज़ेब की छम-छम
मेरे मकाँ से उसकी गली तक
तन्हाई का एक सा आलम
मेरे मकाँ से उसकी गली तक
रास्ते चुप-चुप, रोशनी मद्धम
साए का दीवार से मिलना
दिल से मिलना यादों का
साए का दीवार से मिलना
दिल से मिलना यादों का
साए का दीवार से मिलना
दिल से मिलना यादों का
कैसे-कैसे दिलकश संगम
मेरे मकाँ से उसकी गली तक
तन्हाई का एक सा आलम
मेरे मकाँ से उसकी गली तक
रास्ते चुप-चुप, रोशनी मद्धम
ज़ख़्म इधर महके हैं दिल के
उसने उधर खोली हैं ज़ुल्फ़ें
ज़ख़्म इधर महके हैं दिल के
उसने उधर खोली हैं ज़ुल्फ़ें
ज़ख़्म इधर महके हैं दिल के
उसने उधर खोली हैं ज़ुल्फ़ें
फैला है ख़ुशबू का मौसम
मेरे मकाँ से उसकी गली तक
तन्हाई का एक सा आलम
मेरे मकाँ से उसकी गली तक
रास्ते चुप-चुप, रोशनी मद्धम
मेरे मकाँ से उसकी गली तक
तन्हाई का एक सा आलम
मेरे मकाँ से उसकी गली तक
रास्ते चुप-चुप, रोशनी मद्धम
रास्ते चुप-चुप, रोशनी मद्धम
रास्ते चुप-चुप, रोशनी मद्धम
रास्ते चुप-चुप, रोशनी मद्धम
रास्ते चुप-चुप, रोशनी मद्धम
मेरे मकाँ से उसकी गली तक
तन्हाई का एक सा आलम
मेरे मकाँ से उसकी गली तक
रास्ते चुप-चुप, रोशनी मद्धम
गुज़रे हैं इस सिम्त से शायद
क़ाफ़िले याद की परियों के
गुज़रे हैं इस सिम्त से शायद
क़ाफ़िले याद की परियों के
गुज़रे हैं इस सिम्त से शायद
क़ाफ़िले याद की परियों के
चारों तरफ़ पाज़ेब की छम-छम
मेरे मकाँ से उसकी गली तक
तन्हाई का एक सा आलम
मेरे मकाँ से उसकी गली तक
रास्ते चुप-चुप, रोशनी मद्धम
साए का दीवार से मिलना
दिल से मिलना यादों का
साए का दीवार से मिलना
दिल से मिलना यादों का
साए का दीवार से मिलना
दिल से मिलना यादों का
कैसे-कैसे दिलकश संगम
मेरे मकाँ से उसकी गली तक
तन्हाई का एक सा आलम
मेरे मकाँ से उसकी गली तक
रास्ते चुप-चुप, रोशनी मद्धम
ज़ख़्म इधर महके हैं दिल के
उसने उधर खोली हैं ज़ुल्फ़ें
ज़ख़्म इधर महके हैं दिल के
उसने उधर खोली हैं ज़ुल्फ़ें
ज़ख़्म इधर महके हैं दिल के
उसने उधर खोली हैं ज़ुल्फ़ें
फैला है ख़ुशबू का मौसम
मेरे मकाँ से उसकी गली तक
तन्हाई का एक सा आलम
मेरे मकाँ से उसकी गली तक
रास्ते चुप-चुप, रोशनी मद्धम
मेरे मकाँ से उसकी गली तक
तन्हाई का एक सा आलम
मेरे मकाँ से उसकी गली तक
रास्ते चुप-चुप, रोशनी मद्धम
रास्ते चुप-चुप, रोशनी मद्धम
रास्ते चुप-चुप, रोशनी मद्धम
रास्ते चुप-चुप, रोशनी मद्धम
Writer(s): Zafar Gorakhpuri, Pankaj Udhas Lyrics powered by www.musixmatch.com